Wednesday, 7 December 2011

अबला या बला ?


नारी  क्या  है  ये ...अबला  या  बला  ?
अबला है तो प्यार ही पूजा है  , बला  है तो आज ये तो कल कोई दूजा  है 
अबला है तो पति के चरणों में परमेश्वर है  , बला है तो परमेश्वर के चरणों में पति है 
अबला  है तो दिन में सावन रात में पतझड़ है  , बला है तो दिन में पतझड़  रात  में सावन है 
अबला है तो सत्कार सेवा सम्मान है  , बला है तो  मुसीबतों की  दुकान  है 
अबला हो या बला हो वक़्त ने यही बताया है  ,इसके अंतर्मन को कोई नर समझ न पाया है !

yad ate hain...


Jisne kar di apni puri jindagi mohabbat ke naam ,
       aaj wo bhi dil ke kisi kone me khud ko akela pate hain
Aansuo ko phir bhi kisi tarah rok lete hain ,
       par dil rota hai or kahata hai wo aaj bhi bahut yaad ate hain